वास्तविकता को समझना
मूलभूत सिद्धांत।
वास्तविकता एक दर्पण के रूप में
वास्तविकता को एक परावर्तक प्रणाली के रूप में समझा जाता है जो चेतना की आंतरिक अवस्थाओं पर प्रतिक्रिया करती है।
अनुनाद का नियम (Law of Resonance)
प्रत्येक व्यक्ति एक ऐसी वास्तविकता का अनुभव करता है जो उनके प्रमुख विश्वासों, भावनाओं और कंपन अवस्था के साथ संगत होती है।
भावनाएं और विश्वास
भावनाएं आंतरिक विश्वासों और व्यक्ति की प्राकृतिक अवस्था के बीच संरेखण (alignment) के संकेतक के रूप में कार्य करती हैं।
चेतन जिम्मेदारी
जिम्मेदारी दोष नहीं है। यह व्यक्ति की रचनात्मक शक्ति की मान्यता है। बाहरी अनुभव आंतरिक स्थितियों को दर्शाता है जिन्हें पहचाना और बदला जा सकता है।